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विविध परीक्षाओं से सम्बंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के समाधान

भीम बहादुर चौधरी

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Tuesday, November 8, 2022

November 08, 2022

लैंगिक समानता और समान नागरिक संहिता

लैंगिक समानता और समान नागरिक संहिता

यह एडिटोरियल 07/11/2022 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “The Uniform Civil Code” लेख पर आधारित है। इसमें भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) की संवैधानिकता और अन्य संबंधित मुद्दों के बारे में चर्चा की गई है।


संदर्भ:

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है और इसका अर्थ यह है कि राज्य किसी धर्म विशेष का समर्थन नहीं करता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य वह होता है जो धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद (अनुच्छेद 14-18) समता को और लैंगिक आधार पर गैर-भेदभाव को अनिवार्य बनाते हैं। हालाँकि, कई कानून मौजूद हैं जो स्पष्ट रूप से इन सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और विशेष रूप से कुछ समुदायों के पर्सनल लॉ (Personal laws) में बने रहे हैं, जहाँ ऐसे प्रावधान शामिल हैं जिन्हें महिलाओं के विरुद्ध अत्यधिक भेदभावपूर्ण माना जाता है।

भारतीय आबादी में लगभग आधी हिस्सेदारी के साथ महिलाएँ एक लैंगिक रूप से न्यायपूर्ण संहिता की माँग करती रही हैं ताकि वे भी समता और न्याय का उपभोग कर सकें, चाहे वे किसी भी समुदाय से संबंधित हों। लेकिन भारत में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code- UCC) के आदर्श को अभी तक हासिल नहीं किया जा सका है।

चूँकि समान नागरिक संहिता राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील विषय है, हमारे संविधान निर्माता भी एक समझौते की स्थिति में रहे और इसे उन्होंने अनुच्छेद 44 के अंदर राज्य नीति के एक निदेशक सिद्धांत के रूप में शामिल किया।

चूँकि भारत लैंगिक समता के लिये प्रयासरत है, देश के लिये UCC की प्रासंगिकता पर गहनता से विचार किया जाना आवश्यक है।

समान नागरिक संहिता क्या है?

  • राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP) के अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि पूरे देश में नागरिकों के लिये समान नागरिक संहिता (UCC) सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत में प्रत्येक प्रमुख धार्मिक समुदाय के धर्मग्रंथों और रीति-रिवाजों के आधार पर प्रचलित व्यक्तिगत कानूनों को प्रत्येक नागरिक को एकसमान रूप से नियंत्रित करने वाले नियमों के एक सामान्य समूह से प्रतिस्थापित करना है।
  • UCC में ‘यूनिफॉर्म’ या समान का अर्थ है:
    • समुदायों के बीच कानूनों की एकरूपता/एकसमता।
    • समुदायों के भीतर कानूनों की एकरूपता ताकि पुरुषों एवं महिलाओं के अधिकारों के बीच समानता सुनिश्चित हो।

भारत में UCC की दिशा में किये गए प्रमुख प्रयास

  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954: वर्ष 1954 का विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act of 1954)किसी भी नागरिक के लिये, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, सिविल मैरेज का प्रावधान करता है; इस प्रकार, किसी भी भारतीय को किसी भी धार्मिक व्यक्तिगत कानून की सीमाओं के बाहर विवाह करने की अनुमति देता है।
  • शाह बानो केस, 1985: इस मामले में शाह बानो के भरण-पोषण के दावे को ठुकरा दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 (जो पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के रखरखाव के संबंध में सभी नागरिकों पर लागू होता है) के तहत उसके पक्ष में निर्णय दिया था।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने यह अनुशंसा भी की थी कि लंबे समय से लंबित समान नागरिक संहिता को अंततः अधिनियमित किया जाना चाहिये।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने सरला मुद्गल मामले (1995) और पाउलो कॉटिन्हो बनाम मारिया लुइज़ा वेलेंटीना परेरा मामले (2019) में भी सरकार से UCC लागू करने का आह्वान किया।

UCC के पक्ष में तर्क

  • युवाओं की आकांक्षाओं को समायोजित करना: जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल युग की ओर आगे बढ़ रही है, युवा आबादी की सामाजिक दृष्टि और आकांक्षा समानता, मानवता एवं आधुनिकता के सार्वभौमिक एवं वैश्विक सिद्धांतों से प्रेरित होकर आकार ग्रहण कर रही है।
    • इस प्रकार, समान नागरिक संहिता के अधिनियमन से राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनकी पूरी क्षमता को साकार कर सकने में मदद मिलेगी।
  • राष्ट्रीय एकता का समर्थन: संविधान सभी नागरिकों को विधि न्यायालयों के समक्ष समान व्यवहार की गारंटी प्रदान करता है चाहे वह आपराधिक कानून हो या अन्य नागरिक कानून (व्यक्तिगत कानूनों को छोड़कर)।
    • इस प्रकार, समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन सभी के लिये समान व्यक्तिगत कानून प्रदान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप भेदभाव या रियायतों के मुद्दों का राजनीतिकरण समाप्त हो जाएगा। यह समुदाय विशेष द्वारा उनके विशिष्ट धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के आधार पर उपभोग किये जाते असाधारण लाभ की स्थिति को भी समाप्त कर देगा।
  • पितृसत्तात्मक मानसिकता से ऊपर उठना: अधिकांश धर्मों के मौजूदा व्यक्तिगत कानून समाज के उच्चवर्गीय पितृसत्तात्मक अवधारणाओं पर आधारित हैं। इस प्रकार, समान नागरिक संहिता का संहिताकरण एवं कार्यान्वयन पितृसत्तात्मक रूढ़िवादिता की पवित्रता या स्वीकृति को नष्ट कर सकेगा।
    • इस प्रकार, समान नागरिक संहिता लैंगिक समानता को बढ़ावा देगी और पुरुषों एवं महिलाओं दोनों को बराबरी के स्तर पर लाएगी।
  • न्यायिक प्रक्रिया के लिये सुविधाजनक: देश में हिंदू संहिता, शरिया कानून आदि कई व्यक्तिगत कानून मौजूद हैं। इतने सारे कानूनों की उपस्थिति व्यक्तिगत मामलों के निर्णय में भ्रम, जटिलता और विसंगतियाँ उत्पन्न करती है, जिसके परिणामस्वरूप विलंबन या अपूर्ण न्याय की स्थिति भी बनती है।
    • UCC न्यायपालिका को कुशलतापूर्वक और उचित समय सीमा के भीतर न्याय कर सकने में सक्षम करेगी।

UCC के विरुद्ध तर्क

  • 21वीं विधि आयोग की रिपोर्ट: भारत के विधि आयोग का मत है कि देश में किसी समान नागरिक संहिता का होना व्यक्तिगत/पारिवारिक कानूनों में निहित संघर्षों को सुलझाने के लिये न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।
    • आयोग ने कहा है कि कई देश अब विभिन्न समूहों में अंतर या विविधता को स्वीकार करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं, और केवल अंतर का अस्तित्व में होना भेदभावपरक नहीं माना जा सकता, बल्कि यह तो एक मज़बूत लोकतंत्र का संकेतक है।
    • इसलिये, आयोग ने व्यक्तिगत कानूनों में व्याप्त भेदभाव एवं असमानता से निपटने के लिये मौजूदा पारिवारिक कानूनों में संशोधन का सुझाव दिया है, न कि उनके बीच अंतरों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए।
  • सांस्कृतिक रूप से विविध भारत के प्रतिकूल: भारत में धर्मों, संप्रदायों, जातियों, राज्यों आदि में व्यापक विविधतपूर्ण संस्कृति के कारण विवाह जैसे व्यक्तिगत मुद्दों के लिये समान नियमों का एक समूह लागू कर सकता कठिन है और इसमें कई व्यावहारिक जटिलताएँ सामने आएँगी।
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अतिक्रमण: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं। समान नागरिक संहिता को कई समुदायों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा अपनी धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के लिये एक खतरे के रूप में देखा जाता है ।
    • वे मानते हैं कि समान नागरिक संहिता उनकी परंपराओं की उपेक्षा करेगी और ऐसे नियम लागू करेगी जो मुख्य रूप से बहुसंख्यक धार्मिक समुदायों से प्रभावित होंगे।
  • जनजातियों के स्वदेशी अधिकारों के विरुद्धनगा समुदाय ने दावा किया है कि UCC के कार्यान्वयन से उनकी संस्कृति और गरिमा के लिये स्पष्ट अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं।
    • यह संभावित रूप से सामाजिक अव्यवस्था का कारण बन सकता है, क्योंकि जनजातियों का व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन देश के अन्य लोगों से व्यापक रूप से अलग है।

निष्कर्ष

  • UCC के लक्ष्य को आदर्श रूप से एक सर्वव्यापक दृष्टिकोण के बजाय एक परत -दर-परत दृष्टिकोण के माध्यम से खंडों में प्राप्त किया जाना चाहिये। समान संहिता कोड की तुलना में एक न्यायसंगत संहिता का होना कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है।
  • समान नागरिक संहिता का खाका तैयार करते समय UCC की सामाजिक अनुकूलन क्षमता पर भी विचार करने की आवश्यकता है। चाहे सभी धर्मों के लिये एक ही कानून बनाया जाए या अलग-अलग धर्मों/समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में सुधार किया जाए, वे लैंगिक न्याय पर आधारित होने चाहिये और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि हमारे संविधान में निहित समता का सिद्धांत बरकरार रहे।
  • सार यह है कि सरकार और समाज को एक समान नागरिक समाज की ओर आगे बढ़ने के लिये भरोसे का निर्माण करने की आवश्यकता है जहाँ मानवाधिकारों के प्रति का सम्मान हो और लैंगिक समानता को प्रोत्साहन दिया जाता हो। इस स्थिति का निर्माण किसी समान नागरिक संहिता से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

अभ्यास प्रश्न: भारत में समान नागरिक संहिता के महत्त्व और इसके कार्यान्वयन की राह की बाधाओं पर विचार कीजिये।

November 08, 2022

प्रोविज़नल स्टेट ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट, 2022

प्रोविज़नल स्टेट ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट, 2022


प्रिलिम्स के लिये:

प्रोविज़नल स्टेट ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट, विश्व मौसम विज्ञान संगठन, ग्रीनहाउस गैसें

मेन्स के लिये:

बढ़ती आपदा से संबंधित मुद्दे और इस संबंध में कदम उठाने की ज़रूरत।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने प्रोविज़नल स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट, 2022 जारी की।

  • पूर्ण और अंतिम रिपोर्ट अप्रैल 2023 में प्रकाशित होने की उम्मीद है।

WMO स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट:

  • यह रिपोर्ट वार्षिक आधार पर तैयार की जाती है, जो छठी IPCC आकलन रिपोर्ट द्वारा प्रदान किये गए हाल के मूल्यांकन चक्र का पूरक है।
  • रिपोर्ट प्रमुख जलवायु संकेतकों और चरम घटनाओं एवं उनके प्रभावों पर रिपोर्टिंग का उपयोग करके जलवायु की वर्तमान स्थिति पर एक आधिकारिक सहयोग प्रदान करती है।

प्रमुख बिंदु

  • ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता में वृद्धि:
    • तीन मुख्य ग्रीनहाउस गैसों- कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4) और नाइट्रस ऑक्साइड (NO2) की सांद्रता वर्ष 2021 में रिकॉर्ड स्तर पर थी।
    • मीथेन, जो कि ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति उत्पन्न करने में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 25 गुना अधिक शक्तिशाली है, के उत्सर्जन में सबसे तेज़ गति से वृद्धि हुई है।
      • ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में देशों ने वर्ष 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में कम-से-कम 30% की कटौती करने का संकल्प लिया था।
  • तापमान:
    • वर्ष 2022 में वैश्विक औसत तापमान वर्ष 1850-1900 औसत से लगभग 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक होने का अनुमान है।
    • वर्ष 2015 से 2022 तक आठ सबसे गर्म वर्ष रहने का अनुमान है।
    • ला नीना (भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के जल का ठंडा होना) की स्थिति वर्ष 2020 के अंत से प्रभावी है और वर्ष 2022 के अंत तक जारी रहने की उम्मीद है।
      • ला नीना ने पिछले दो वर्षों से निरंतर वैश्विक तापमान को अपेक्षाकृत कम किया है, फिर भी वर्ष 2011 में पिछले महत्त्वपूर्ण ला नीना की तुलना में यह अधिक है।
  • ग्लेशियर और बर्फ:
    • वर्ष 2022 में यूरोपीय आल्प्स में ग्लेशियर पिघलने का रिकॉर्ड टूट गया। पूरे आल्प्स में 3 और 4 मीटर से अधिक की औसत मोटाई के ग्लेशियर के नुकसान के साथ वर्ष 2003 के पिछले रिकॉर्ड की तुलना में यह काफी अधिक मापा गया है।
    • प्रारंभिक माप के अनुसार, स्विट्ज़रलैंड में वर्ष 2021 और 2022 के बीच ग्लेशियर की बर्फ 6% पिघल गई।
    • इतिहास में पहली बार उच्चतम माप स्थलों पर भी गर्मी के मौसम में बर्फ नहीं गिरी और इस प्रकार नवीन बर्फ का संचय नहीं हुआ।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि:
    • उपग्रह altimeter रिकॉर्ड के 30 वर्षों (1993-2022) के दौरान वैश्विक औसत समुद्र स्तर में अनुमानित 3.4 ± 0.3 मिमी प्रतिवर्ष की वृद्धि हुई है।
    • वर्ष 1993-2002 और 2013-2022 के बीच यह दर दोगुनी हो गई है तथा जनवरी 2021 एवं अगस्त 2022 के बीच समुद्र के स्तर में लगभग 5 मिमी. की वृद्धि हुई है।
  • महासागरीय ऊष्मा:
    • मानव द्वारा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप संचित ऊष्मा का लगभग 90% समुद्र में जमा हो जाता है।
    • ऐसा पाया गया कि वर्ष 2021 में समुद्र के ऊपरी सतह से लेकर 2000 मीटर तक अभूतपूर्व स्तर तक गर्म हुआ।
    • कुल मिलाकर, समुद्री सतह के 55% हिस्से ने वर्ष 2022 में कम -से-कम एक समुद्री हीटवेव का अनुभव किया
    • जबकि समुद्र की सतह के केवल 22% हिस्से में ही समुद्री ठंड का अनुभव हुआ। शीत लहरों की तुलना में समुद्री हीटवेव लगातार अधिक होती जा रही है।
  • खराब मौसम:
    • विगत 40 वर्षों की तुलना में पूर्वी अफ्रीका में लगातार चार वर्षों से बारिश औसत से कम रही है जो इस बात का संकेत हो सकती है कि वर्तमान मौसम भी शुष्क हो सकता है।
    • जुलाई और अगस्त, 2022 में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति बन गई ।
      • भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में मार्च और अप्रैल में हीटवेव के बाद बाढ़ आई थी।
    • उत्तरी गोलार्द्ध के बड़े हिस्से असाधारण रूप से गर्म और शुष्क रहे थे।
      • राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किये जाने के बाद से चीन में सबसे व्यापक और दीर्घकालिक हीटवेव को दर्ज किया गया और रिकॉर्ड के अनुसार यहाँ दूसरी सबसे शुष्क गर्मी थी।
    • यूरोप के बड़े हिस्से को बार-बार भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
      • यूनाइटेड किंगडम ने 19 जुलाई, 2022 को रिकॉर्ड गर्मी का अनुभव किया जब वहाँ का तापमान पहली बार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच गया।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये उठाए गए कदम:

  • राष्ट्रीय:
    • NAPCCC:
      • जलवायु परिवर्तन से उभरते खतरों का सामना करने के लिये भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC) जारी की। इसमें राष्ट्रीय सौर मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन आदि सहित 8 उप मिशन हैं।
    • इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान: यह शीतलक मांग में कमी लाने सहित शीतलक और संबंधित क्षेत्रों के लिये एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है। इससे उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी जिससे ग्लोबल वार्मिंग से निपटने में मदद मिलेगी।
  • वैश्विक:
    • पेरिस समझौता:
      • इसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखना है, जबकि इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिये आवश्यक कदम उठाना है।
    • संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्य:
      • सतत् विकास को प्राप्त करने के लिये इसके अंतर्गत 17 व्यापक लक्ष्य शामिल हैं। इनमें से लक्ष्य संख्या 13 , विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के समाधान पर केंद्रित है।
    • ग्लासगो संधि:
      • इसे अंततः COP26 वार्ता के दौरान वर्ष 2021 में 197 सदस्यों द्वारा अपनाया गया था।
      • इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि 1.5 डिग्री के लक्ष्य को हासिल करने के लिये मौजूदा दशक में इस दिशा में मज़बूत निर्णायक कार्रवाई करना आवश्यक है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO):

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) 192 देशों की सदस्यता वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है।
    • भारत विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सदस्य देश है।
  • इसकी उत्पत्ति अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन (IMO) से हुई है, जिसे वर्ष 1873 के वियना अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान कॉन्ग्रेस के बाद स्थापित किया गया था।
  • 23 मार्च, 1950 को WMO कन्वेंशन के अनुसमर्थन द्वारा स्थापित WMO, मौसम विज्ञान (मौसम और जलवायु), जल विज्ञान तथा इससे संबंधित भू-भौतिकीय विज्ञान हेतु संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गई है।
  • WMO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।

आगे की राह

  • ऐसी महत्त्वपूर्ण नीतियों और उपायों से संबंधित प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जो संसाधनों के उत्पादन और उपभोग के तरीके को तीव्रता से बदल सकते हैं।
  • लोगों के साथ साझेदारियों वाले दृष्टिकोण को प्रमुखता देना चाहिये जिससे न केवल नौकरियाँ सृजित होने के साथ संसाधनों तक सुलभ पहुँच होगी बल्कि स्वच्छ और हरित वातावरण का भी विकास होगा।

Friday, August 5, 2022

August 05, 2022

मंगल_पांडे (क्रांतिकारी)

#मंगल_पांडे (क्रांतिकारी)

* मंगल पांडे प्रथम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम क्रांतिकारी थे
* भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात 1857 के संग्राम की शुरुआत इन्हीं के विद्रोह से शुरू हुआ था
* मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था
* मंगल पांडे का जन्म तारीख व स्थान पर अभी भी विवाद है
* मंगल पांडे के पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का अभय रानी देवी था
* मंगल पांडे एक बहन और तीन भाई थे
* मंगल पांडे जीवन भर अविवाहित थे
* मंगल पांडे कट्टर पंडित थे
* एक बार मंगल किसी काम से अकबरपुर आए थे उसी समय ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना बनारस से लखनऊ जा रही थी मंगल सेना का मार्च देखने के लिए कौतुहलवश सड़क के किनारे आकर खड़े हो गये
* एक सैनिक अधिकारी ने मंगल पांडे को तगड़े और स्वस्थ देखकर सेना में भर्ती हो जाने का आग्रह किया, गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें रोजी-रोटी की मजबूरी ने अंग्रेजों की फौज में नौकरी करने पर मजबूर कर दिया
* 10 मई सन 1846 को मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती हुए
* मंगल पांडे कोलकाता के पास बैरकपुर सैनिक छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की पैदल सेना के 1446 नंबर के सैनिक थे
* मंगल को वेतन के रूप में ₹7 प्रति महीना मिलता था
* 30 जनवरी 1857 को एक जमादार ने इन्हें यह बताया कि अंग्रेज जो कारतूस देते हैं वह गौ मांस का बना होता है
* गौ मांस के नाम पर मंगल पांडे आग बबूला हो गए और अपने साथी सैनिकों को भी बताएं तो वह भी क्रोधित हो गए
* 29 मार्च 1857 की सुबह बैरकपुर छावनी के परेड मैदान में मंगल पांडे ने अंग्रेजो के खिलाफ बिगुल फूंका था
* जनरल ह्राूसन ने एक जमादार को मंगल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया पर वह अनसुना कर दिया था क्योंकि वह भारतीय था इसलिए इसे 6 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी
* मिस्टर बासु घोड़े पर सवार होकर मंगल की तरफ आने लगे तो मंगल ने उनपर गोलिया दाग दी और वह नीचे गिर गए इस तरह आजादी की पहली गोली चली थी
* मंगल पांडे ने ह्राूसन के बीच में आने पर उसे भी गोली मार दिए थे और इस तरह पूरा बैरकपुर छावनी गोलियों से गूंज उठा था
* मंगल पांडे ने अपने साथी सैनिकों के साथ न देने पर खुद को गोली मार ली और घायल हो गए जिससे वह गिरफ्तार कर लिये गये
* मंगल पांडे को फांसी की सजा 18 अप्रैल 1857 को रखी गई थी पर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण उसके 10 दिन पहले ही 8 अप्रैल 1857 को इन्हें फांसी दे दी गई
* धर्म के लिहाज से कोई जल्लाद इन्हें फांसी देने को तैयार नहीं था इसलिए अंग्रेजों ने कोलकाता से एक जल्लाद को बुलाया था जिसे यह नहीं बताया गया कि उसे किसे फांसी देनी है
* मंगल पांडे जिस पलटन में थे, उसके सारे सैनिकों को सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि अंग्रेज़ों को शक था कि वो सभी मंगल पांडे जैसे विचार रखते है और किसी भी समय उनके खिलाफ़ विद्रोह कर सकते है

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August 05, 2022

आयकर_विभाग

#आयकर_विभाग

* आयकर वह कर होता है जो सरकार लोगों की आय पर आय में से लेती है
* आयकर लेने वाले विभाग को आयकर विभाग कहते हैं
* जेम्स विल्सन की ओर से आयकर सबसे पहले 24 जुलाई 1860 को पेश किया गया था
* आयकर एक कर की सरकारों को अपने क्षेत्राधिकार के भीतर सभी संस्थाओं द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है
* आयकर धन का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है जिसे सरकार अपनी गतिविधियों निधि और जनता की सेवा करने के लिए उपयोग करता है
* भारत सरकार व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों, कंपनियों, फर्मों, सहकारी समितियों और ट्रस्टों और किसी भी अन्य कृतिम व्यक्ति के कर योग्य आय पर आयकर लगाता है
* कर का भार प्रत्येक व्यक्ति पर अलग होता है यह उदग्रहण भारतीय आयकर अधिनियम 1961 द्वारा शासित है
* भारतीय आयकर विभाग केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा संचालित है
* भारतीय आयकर विभाग भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग का हिस्सा है
* भारत का आयकर अधिनियम निम्न तत्वों / भागों से मिलकर बना है
> आयकर अधिनियम 1961 
> वित्त अधिनियम 
> आयकर नियमावली 
> परिपत्र / अधिसूचना 
> न्यायालय के विधायी निर्णय
* भारत में प्रतिवर्ष 24 जुलाई को आयकर दिवस मनाया जाता है
* वर्ष 2010 में पहली बार आयकर दिवस मनाया गया था
* पहले आयकर दिवस का आयोजन राजधानी दिल्ली में हुआ था इसमें वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने यादगार बनाने के लिए डाक टिकट और सिक्के भी जारी किए थे
* आयकर दिवस के अवसर पर आयकर विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है
August 05, 2022

बॉम्बे_स्टॉक_एक्सचेंज (BSE)

#बॉम्बे_स्टॉक_एक्सचेंज (BSE)

* बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत और एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है
* इसकी स्थापना 9 जुलाई 1875 को हुई थी
* इस एक्सचेंज की पहुंच 417 शहरों तक है
* बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारतीय शेयर बाज़ार के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है दूसरा एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है
* भारत को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजार में अपना श्रेष्ठ स्थान दिलाने में बीएसई की अहम भूमिका है
* एशिया के सबसे प्राचीन और देश के प्रथम स्टॉक एक्सचेंज को - बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सिक्युरिटीज कांट्रेक्ट रेग्युलेशन एक्ट 1956 के तहत स्थाई मान्यता मिली है
* इसका लक्ष्य है - 'वैश्विक कीर्ति की पताका फहराकर प्रमुख भारतीय स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरना'
* भारतीय पूंजी बाजार के विकास में इस एक्सचेंज की व्यापक भूमिका रही है और इसका सूचकांक विश्वविख्यात है
* मैनेजिंग डायरेक्टर के नेतृत्व में डायरेक्टर्स बोर्ड द्वारा एक्सचेंज का संचालन होता है
* इस बोर्ड में प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स, ट्रेडिंग सदस्यों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक प्रतिनिधियों का समावेश है
* एक्सचेंज भारत के छोटे - बड़े शहरों में अपनी उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है
* बीएसई की सिस्टम और प्रक्रिया ऐसी है कि बाजार की पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे
* वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर, सर्वोच्च स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरने वाले इस एक्सचेंज के पास सवा सौ से अधिक वर्षों के भव्य इतिहास की समृद्ध विरासत है
* एक्सचेंज में `ट्रेडिंग राइट' और `ओनरशिप राइट' एक दूसरे से अलग है ऐसी परिस्थिती में निवेशकों के हितों पर विशेष सावधानी बरती जाती है
* एक्सचेंज इक्विटी, डेब्ट तथा प्युचर्स और ऑप्शन के व्यापार के लिए ढांचा एवं पारदर्शक ट्रेडिंग सिस्टम सुनिश्चित करता है
* बीएसई की आनलाइन ट्रेडिंग प्रणाली बेहतरीन गुणवत्तावाली है
* वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त इन्फार्मेशन सिक्युरिटी मैनेजमेंट सिस्टम का दर्जा BS 7799-2:2002 सर्टिफिकेट वाला है
* BS 7799 ऑडिट डीएनवी (Det Norske Veritas) द्वारा किया गया था यह प्रमाणपत्र प्राप्त करनेवाला बीएसई भारत का एकमात्र और विश्व का दूसरा एक्सचेंज है
* जानकारी एकत्रित करने, जोखिम को नियंत्रित करने तथा तकनीकी प्रणाली और लोगों की सम्पत्ती की सुरक्षा के लिए BS 7799 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानक है
* भारत में शायद ही ऐसी कोई कंपनी होगी जिसने पूंजी सर्जन के लिए बीएसई की सेवा नहीं ली हो
* बीएसई भारत में कैपिटल मार्केट का प्रतीक माना जाता है
* बीएसई सेंसेक्स देश के अर्थतंत्र और वित्त बाजार की गतिविधियों को प्रतिबिम्बित करता बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स है
* इक्विटी डेरीवेटिव्स, फ्री प्लोट इंडेक्स, यूएस डॉलर आधारित सेन्सेक्स, एक्सचेंज आधारित इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफार्म स्थापित करने पहला एक्सचेंज है
* फाइनेंशियल ट्रेनिंग के लिए अलग विशेष सुविधा की व्यवस्था करने वाला पहला एक्सचेंज
August 05, 2022

प्रथम_विश्व_युद्ध (First World War)

#प्रथम_विश्व_युद्ध (First World War)

* प्रथम विश्वयुद्ध पूरी दुनिया को हिला कर रख देने वाला एक महायुद्ध था
* यह युद्ध एशिया अफ्रीका यूरोप तीनों महाद्वीप में लड़ा गया
* यह युद्ध जल थल वायु सभी जगहों से लड़ा गया था
* इस महा युद्ध में करीब आधी दुनिया चपेट में आई थी
* प्रथम विश्व युद्ध के कारण
> राष्ट्रीय भावना का विकास करने वाली सोच
> सभी राष्ट्र अपना सेन्यवाद और शस्त्रीकरण बढ़ाना चाहते थे
> समाचार पत्र व प्रचार साधनों के द्वारा गलत प्रचार
> अन्तर्राष्ट्रीय शांति कायम करने वाली संस्थओं का अभाव होना
> गुप्त संधियो का प्रचलन
> अंतर्राष्ट्रीय अराजकता का फेलना
> आर्थिक प्रति द्वन्द्विता तथा साम्राज्यवाद का होना
> जर्मन चांसलर विलियम कैंसर का चरित्र
> तात्कालिक कारण
* प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 को आस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर आक्रमण किये जाने से हुई
* इस युद्ध में कुल 37 देशों ने भाग लिया था
* प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण आस्ट्रिया के राजकुमार फेर्ड़ीनंद की हत्या थी
* राजकुमार फेर्ड़ीनंद की हत्या बोसिन्निया की राजधानी सेराजवो में हुई थी
* सम्पूर्ण विश्व प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दो भागो में बाँट गया था इनके नाम थे मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र
* जर्मनी ने धुरी राष्ट्र का नेतृत्व किया था इसमें आस्ट्रिया, हंगरी तथा इटली इत्यादि देश शामिल थे
* संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस,जापान, इंग्लैंड और फ्रांस आदि देश मित्र राष्टों में शामिल थे
* प्रथम विश्व युद्ध के समय वुडरो विल्सन अमेरिका के राष्ट्रपति थे
* इंग्लैंड के लुसितेनिया नामक जहाज को जर्मनी के यु-बोट द्वारा डूबा दिया गया था इस जहाज पर मरने वाले 1153 लोगों में से 128 लोग अमेरिकन थे इसी कारण अमेरिका प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ था
* अमेरिका 6 अगस्त 1917 को, इटली 26 अप्रैल 1915 को युद्ध में शामिल हुआ
* 30 देशों के 6.5 करोड़ लोगो ने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था जिसमें 60 लाख मित्र राष्ट्रों के सैनिक तथा 40 लाख धुरी राष्ट्रों के सैनिक मारे गए थे
* आग फेकने वाली तोप का इस्तेमाल सबसे पहले जर्मनी ने किया था जो 130 फीट की दूरी तक आग फेंक सकती थी
* इस विश्व युद्ध में 3 में से 2 लोग बीमारी की वजह से मारे गए थे
* इस विश्व युद्ध के बाद बहुत से सैनिकों का पूरा जीवन अस्पताल में बीता
* प्रथम विश्व युद्ध इतिहास का छठा सबसे बड़ा युद्ध था
* Little Willie प्रथम विश्व युद्ध का पहला टेंक था
* युद्ध के दौरान संदेशों का आदान प्रदान करने के लिए कुत्तों का उपयोग होता था
* रूस के पास सबसे बड़ी सेना थी
* इस युद्ध में 30 तरह के गैसों का प्रयोग किया गया था
* अडोल्फ़ हिटलर प्रथम विश्व युद्ध में जर्मन सेना में शामिल था तथा घायल होने पर एक ब्रिटिश सैनिक ने उसकी जान बचाई थी
* इस युद्ध में 8000000 घोड़े मारे गये
* करीब 4 साल बाद 11 नवंबर 1918 को प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ
* युद्ध के बाद शांति के लिए लीग ऑफ नेशंस की स्थापना हुआ
August 05, 2022

हाउस_अरेस्ट_या_नज़रबंदी

#हाउस_अरेस्ट_या_नज़रबंदी_किसे_कहते_हैं_और_इससे_जुड़े_नियम_क्या_हैं?
जम्मू और कश्मीर में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने महबूबा मुफ़्ती और और अन्य नेताओं को एहतियात के तौर पर हाउस अरेस्ट कर दिया है. इसके पहले भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में पुणे की पुलिस ने पांच बुद्धिजीवियों और राइट एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों को हाउस अरेस्ट रखने के आदेश जारी किये हैं. अब यह सवाल उठता है कि आखिर यह हाउस अरेस्ट या नज़रबंदी क्या होती है.

#अरेस्ट_वॉरंट_या_गिरफ़्तारी_के_आदेश

किसी अभियुक्त को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट अरेस्ट वॉरंट यानि गिरफ्तारी का आदेश जारी करता है. अरेस्ट वॉरंट के तहत संपत्ति की तलाशी ली जा सकती है और उसे जब्त भी किया जा सकता है. अपराध की प्रकृति के आधार पर अरेस्ट वॉरंट की प्रकृति भी निर्भर करती है. अरेस्ट वॉरंट जमानती और गैर-जमानती हो सकता है. संज्ञेय अपराध की स्थिति में पुलिस अभियुक्त को बिना अरेस्ट वॉरंट के गिरफ़्तार कर सकती है.

#सर्च_वॉरंट

सर्च वॉरंट वह कानूनी अधिकार है जिसके तहत पुलिस या फिर जांच एजेंसी को घर, मकान, बिल्डिंग या फिर व्यक्ति की तलाशी के आदेश दिए जाते हैं. पुलिस इसके लिए मजिस्ट्रेट या फिर जिला कोर्ट से इजाजत मांगती है.

#हाउस_अरेस्ट_या_नज़रबंदी

जब तक कोर्ट यह तय नहीं कर पाती है कि कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए दोषी है या नहीं तो उसे जेल नहीं भेजती है और उस आरोपी व्यक्ति को खुला घूमने से रोकने के लिए कोर्ट हाउस अरेस्ट या नज़रबंदी का आदेश देती है. इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति अपने घर से बाहर न निकल पाए. #हालाँकि_भारतीय_कानून_में_हाउस_अरेस्ट_शब्द_का_ज़िक्र_नहीं_है. अर्थात हाउस अरेस्ट की स्थिति में व्यक्ति को थाने या फिर जेल नहीं ले जाया जाता है बल्कि उसके घर में ही बंद रखा जाता है.

हाउस अरेस्ट के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति किस से बात करे, किससे नहीं, इस पर पांबदी लगाई जा सकती है. आरोपी व्यक्ति को सिर्फ घर के लोगों और अपने वकील से बातचीत की इजाजत दी जा सकती है.

#हाउस_अरेस्ट_की_दशा_में;

1. यह सोचना बिलकुल गलत है कि घर में नजरबन्द व्यक्ति हमेशा घर में जेल की तरह कैद रहता है बल्कि सच यह है कि यदि आरोप बहुत संगीन नहीं हैं तो आरोपी को उसके सामान्य काम जैसे स्कूल, डॉक्टर से मिलना, किसी से मिलना, सामुदायिक सेवा और अदालतों द्वारा तय किये गए अन्य काम करने की अनुमति होती है. हालाँकि इस दौरान सुरक्षा कर्मी आरोपी के साथ रहेंगे और उसे एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डिवाइस पहनना होगा.

2. हाउस अरेस्ट कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के पहले की दशा है अर्थात इस दशा में व्यक्ति को बिना जेल भेजे जेल जैसी स्थितियों में रखने की कोशिश होती है.

3. #सामान्यतः आरोपी व्यक्ति को बाहर यात्रा करने की छूट नहीं होती है हालाँकि किन्ही विशेष दशाओं में अनुमति दी जा सकती है.

4. हाउस अरेस्ट की सजा क्रिमिनल लोगों को भी दी जा सकती है यदि जेल की सजा किन्ही विशेष कारणों से ठीक/सुरक्षित नहीं है.

5. आमतौर पर घर में नजरबन्द व्यक्ति को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होती है लेकिन यदि इस्तेमाल करने की छूट मिलती है तो उसका इस्तेमाल सम्बंधित अधिकारियों की निगरानी में ही होता है.

6. आरोपी व्यक्ति पर नजर रखने के लिए उसे किसी विशेष #इलेक्ट्रॉनिक_डिवाइस को पहनने को कहा जाता है ताकि उस पर दिन रात नजर रखी जा सके.

7. हाउस अरेस्ट की दशा में आरोपी व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मोनिटरिंग सर्विस का भुगतान खुद करना होगा.

8. हाउस अरेस्ट का बड़ा नुकसान यह है कि इसमें आरोपी व्यक्ति को उसके अच्छे आचरण के कारण सजा में छूट नहीं मिलती है जैसे कि जेल में रहते हुए कैदी को मिलती है.

#हाउस_अरेस्ट_की_दशा_में_आरोपी_व्यक्ति_के_क्या_अधिकार_होते_हैं;

चाहे आप वयस्क नागरिक हों या गैर-नागरिक हों, अगर आपको गिरफ्तार किया गया है तो आपके पास कुछ अधिकार हैं जिन्हें आपको बताना कानून प्रवर्तन अधिकारी की जिम्मेदारी है. ये अधिकार हैं ;

1. हाउस अरेस्ट की अवस्था में यदि किसी व्यक्ति से कोई इन्वेस्टीगेशन करनी होती है तो उसका वकील उसके साथ बैठ सकता है यदि कोई आरोपी वकील को हायर नहीं कर सकता है तो उसे वकील अदालत की तरफ से दिया जाता है.

2. हाउस अरेस्ट की दशा में आरोपी के पास यह अधिकार होता है कि वह अपना नाम, पता और पहचान चिन्ह के अलावा कुछ भी बताने से इंकार कर सकता है.

3. आरोपी इस पूछताछ के दौरान जो कुछ भी बोलता है उसका इस्तेमाल आरोपी के खिलाफ अदालत में सबूत के तौर पर किया जा सकता है.

ऊपर लिखे गए तीनों अधिकार आरोपी को संविधान ने दिए हैं. यदि कानून प्रवर्तन अधिकारी इन अधिकारों के बारे में आरोपी व्यक्ति को नहीं बताता है तो उसके द्वारा हाउस अरेस्ट के दौरान दिया गया स्टेटमेंट उसके खिलाफ अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

ऊपर लिखे गए तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि हाउस अरेस्ट, जेल की तुलना में थोड़ी राहत भरी सजा होती है. इसके साथ ही यह कम खर्चीली दंडात्मक कार्यवाही है जो कि अपराध पर नियंत्रण करने के लिए बनायीं गयी है.